Tuesday, September 11, 2018

Insulin or diabetes ka rishta

इन्सुलिन एक तरह का हॉर्मोन होता है जो हमारी बॉडी produce करती है pancreas के through .
इन्सुलिन आपके ब्लड में ग्लूकोस के स्तर को नियंत्रित रखता है बल्कि यह फैट को सरंक्षित करने
में भी एक बहुत अच्छी भूमिका निभाता है। शरीर में शक्ति प्रदान करने के लिए ब्लड के माध्यम
से कोशिकाओं (cells ) में ग्लूकोस पहुंचने का काम इन्सुलिन की मदद से पूरा होता है।
इन्सुलिन कब release होगा जब हम carb खाते है या कुछ मीठा खाते है जब हमारा blood
sugar बढ़ जाता तो इन्सुलिन रिलीज़ होती  है। insulin हमारे blood  sugar  को different
part of body में लेकर जायेगा जैसेकि muscles ,Brain और liver वहाँ पर जाकर ये आपके
glucose या blood sugar को स्टोर कर देगा।
इन्सुलिन कमी से या इन्सुलिन का सही तरीके से कार्य न कर पाने से डाइबिटीज़ के लक्षण
विकसित होने लगते है।

आइये जानते है इन्सुलिन के बारे में:

इन्सुलिन काम कैसे करता है 

हमारी बॉडी में एक ग्रंथि (GLAND) होता है  pancreas . Pancreas में मौजूद होती है beta cells 
इन beta cells से रिलीज़ होता है इन्सुलिन। जब हमारी बॉडी में मौजूद  beta cell इन्सुलिन produce 
नहीं करती है तब हम उसे डाइबिटीज़ बोलते है। इन्सुलिन का काम होता है जो हम खाना खाते 
है उसे ग्लूकोस में convert कर के Blood vessels में पहुंचना। जब हमें डाइबिटीज़ होती है तब 
हमारा 50% pancreas काम करना बंद कर  देता है मतलब तब हमारा pancreas insulin  produce 
करना बंद कर देता है जिससे हमे डॉयबिटीज़ होती है। 

इन्सुलिन लेने का सही तरीका 

डॉयबिटीज़ के मरीज सिरिंज का इस्तेमाल भी कर सकते है परन्तु आज कल इन्सुलिन PEN भी  
मार्किट में मिल जाता है उसका इस्तेमाल करे क्यूंकि इसे लगाना बहुत आसान है। इन्सुलिन का इंजेक्शन 
हमेशा खाना खाने से पहले लगाना चाहिए। सुबह नाश्ता करने से 15 से 20 मिनट पहले लगाना चाहिए  
और रात को खाना खाने से भी 15 से 20 मिनट पहले लगाना चाहिए। इन इंजेक्शन के बीच में कम 
से कम 10 से 12 घंटों का फासला होना चाहिए। इन्सुलिन को ठंडी और साफ़ जगह पर हे रखे। 

इन्सुलिन की जरुरत कब और किसे पड़ती है 

डॉयबिटीज़ के मरीज जिन्हे दिल की बीमारी हो या लकवे का अटैक हो चूका हो ,आँखों की बीमारी
हो या कोई इन्फेक्शन हो ,टीवी हो  या कोई ऑपरेशन होने वाला हो उन्हें इन्सुलिन की आवश्यकता
पड़ती है। डॉयबिटीज़ से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को भी इसकी जरुरत पड़ती है।
टाइप 1 डॉयबिटीज़ के मरीजों में pancreas के beta cells ख़राब होने के कारण या नष्ट होने
के कारण हमारी बॉडी में इन्सुलिन नहीं बन पता। इन्सुलिन न बनने के कारण टाइप 1 डॉयबिटीज़ 
के मरीजों  को इन्सुलिन  आबशयकता पड़ती है।
टाइप 2  डॉयबिटीज़ के मरीजों में इन्सुलिन तो बनता है पर पर्याप्त मात्रा में नहीं बन पाता तो इन्हे
दवाई के रूप में इन्सुलिन लेने की आवश्यकता पड़ती है ताकि उनके ग्लूकोस प्रक्रिया में
मदद मिल सके।

क्या डॉयबिटीज़ का इलाज संभब है 


डॉयबिटीज़ का इलाज संभब तो नहीं है पर हम डॉयबिटीज़ को कण्ट्रोल कर सकते है आइये जानते
है कैसे :
1) रोज़ सुबह या शाम को कम से कम  30 से 45 मिनट walk करे ,exerciseकरे जिससे आपका
blood sugar level कण्ट्रोल रहे।
2) बीड़ी ,सिगरेट शराब और junk फ़ूड से दूर रहे
3) संतुलित आहार ले।
 

इन्सुलिन की खोज 

इन्सुलिन की खोज फ्रेडरिक ग्रांट बेटिंग ने की थी इस खोज में उनका साथ चार्ल्स हर्बर्ट ने दिया था। 
इसके लिए 1921 में फ्रेडरिक ग्रांट बेटिंग ने प्रयोग एक कुत्ते पर किया था।डॉयबिटीज़  के इलाज के लिए 
ये खोज कारगर सिद्ध हुई। इस महान कार्य के लिए फ्रेडरिक को नोबेल पुरस्कार  था। 
मनुष्य पर इसका प्रयोग 1922 में किया गया था।  टाइप 1 डॉयबिटीज़ से पीड़ित लियोनार्ड थॉम्पसन 
नाम का 14 वर्षीय बच्चे पर इस इन्सुलिन रूपी दवा का प्रयोग किया गया। इस दवा के नतीजे 
 सफ़ल रहे थे  लेकर तब  से लेकर आजतक इन्सुलिन रूपी दवा का प्रयोग हो रहा है। 




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