Tuesday, October 30, 2018

डिप्रेशन क्या है और क्या है सिम्टम्स

What is depression and how to overcome?

"Depression kya hai"











 Depression: दोस्तों डिप्रेशन को हम कई नाम से जानते है  निराशा ,अवसाद ,उदासी 

और भी कई नाम से जानते  है। डिप्रेशन एक कॉमन बीमारी है जिसमे आपका मन उदास रहता है। 
उदासी का ये मतलब नहीं आप उदास है तो आप डिप्रेशन  में हो। डिप्रेशन नार्मल उदासी से अलग 
होती है डिप्रेशन को हम दो तरीकों से समझ सकते है 
a) डिप्रेशन में हमे बहुत उदासी रहती है, 
b)और ये लगातार रहती है। 
नार्मल उदासी और डिप्रेशन वाली उदासी में यही फरक है कि नार्मल उदासी कुछ समय के लिए रहती 
है फिर आप नार्मल हो जाते हो जबकि डिप्रेशन वाली उदासी लगातार रहती है। जो चीज़े आपको खुश 
कर पाती थी जैसे आपकी फैमिली,आपके दोस्त और भी जिससे आपको ख़ुशी मिलती थी डिप्रेशन की 
वजह से ये भी आपको खुश नहीं कर पाती है। 
डिप्रेशन की बीमारी कई सदियों से चलती आ रही है। 20वी सदी में भी लोग डिप्रेशन के शिकार थे।
पर 21वी सदी में डिप्रेशन की बीमारी 10 गुना तक बढ़ गयी है। डिप्रेशन का शिकार कोई भी हो सकता
है चाहे बच्चा हो या बड़ा।

Depression के कई कारण हो सकते है :

डिप्रेशन के कई कारण हो सकते है जैसे व्यापार की टेंशन,बच्चों की पढ़ाई की टेंशन,Unhealthy lifestyle,
जॉब की टेंशन,किसी के प्यार में धोका मिलना,फैमिली टेंशन,Workload और भी कई कारण डिप्रेशन के 
हो सकते है। जब आप डिप्रेशन का शिकार होते है तो आपका किसी भी चीज़ में मन नहीं लगता और
आपको ऐसा लगता है अब ये ही मेरी जिंदगी है जैसे कट रही है वैसे ही कटने दो। आपको कोई अच्छे बुरे
का ख्याल नहीं होता। आप डिप्रेशन से अपने आप को पोस्टिव रख कर बाहर आ सकते हो। सब कुछ
आप पर depend करता है आप क्या सोचते हो क्या करना चाहते हो। किस तरह से आप डिप्रेशन से
बाहर आए। आप अपनी जिंदगी को अच्छी तरह से जी सकते हो। सब कुछ आप पर डिपेंड करेगा आपको
आपसे अच्छा कोई नहीं जान सकता।

Depression के लक्षण :

1) Neagtive Thoughts बार बार आना भी डिप्रेशन का कारण हो सकता है। जिनके मन में Neagtive Thoughts आते है वो छोटा सा छोटा निर्णय भी सही समय पर नहीं ले पाते है या वे छोटा सा छोटा 
निर्णय लेने में भी काफी समय लगा देते है। उनके मन में यही रहता है कि मेरे साथ कोई उन्होनी न 
हो जाये। 
2) Feeling Irritate{चिड़चिड़ापन}:डिप्रेशन का कारण चिड़चिड़ापन भी हो सकता है। आपसे कोई 
लगातार बात कर रहा है और आप उसका जबाब न दे और आप हर बात पर गुस्सा हो जाये। ये भी 
डिप्रेशन का कारण है। 
3) Lack of Focus: Lack of Focus मतलब किसी भी काम पर फोकस न कर पाना भी एक डिप्रेशन 
का कारण हो सकता है। आप किसी भी बात पर बार-बार गुस्सा कर रहे हो और अपने काम पर फोकस 
नहीं कर पा रहे हो ये भी डिप्रेशन का कारण है। 
4) Lack Of Self-Esteem and Self Confidence{आत्मसमान और आत्मविश्वास की कमी}:
नकरात्मक सोच भी आपके आत्म सम्मान और आत्म विश्वास को कम कर सकती है। डिप्रेशन का 
कारण एक नकारत्मक सोच भी है। आप अपने आप को दूसरों से कम आंकना शुरू कर देते हो 
जो आपके आत्मविश्वास में कमी लाता है। आप अपने लिए कुछ करना चाहते है ,या आप अपनी लाइफ 
में कोई स्टेप लेना चाहते है पर आपको लगता है की लोग मेरे बारे में क्या सोचेगे। ये भी आत्मविश्वास की 
कमी को दर्शाता है। 
5) आत्महत्या: डिप्रेशन में आत्महत्या का खतरा भी बढ़ जाता है। बच्चे और महिलाएं इसका ज्यादा 
 शिकार होते है। महिलाएं पुरुषो के मुकाबले डिप्रेशन के कारण आत्महत्या करने का ज्यादा सोचती है। 
ये किसी भी कारण से हो सकता है जैसे अकेलेपन या किसी और कारण से भी। 
6) नींद न आना:नींद न आना भी एक डिप्रेशन का एक कारण हो सकता है। जब आप सोने लगते हो 
तो आपको बुरे सपने आते है और आपको घबराहट महसूस होने लग जाती है। जिससे आपको नींद 
नहीं आती है।

WHO REPORT:

1)World Health Organisation के मुताबिक विश्व में 300 मिलियन यानि 30 करोड़ लोग डिप्रेशन से 
पीड़ित है। ये विश्व की आबादी का लगभग 4.2% होगा। 

2) डिप्रेशन के शिकार पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा पीड़ित हैं। 

3) भारत में लगभग 5.5 मिलियन यानि 5 करोड़ लोग 50 लाख लोग डिप्रेशन से पीड़ित है। उनमे से 
3.2 करोड़ लोग "एग्ज़ाइटी" यानि बेचैनी से पीड़ित है। 

4) National Mental Health Survey {NHMS} की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 14 से कम साल 
के बच्चे भी डिप्रेशन के शिकार है। इनमे लड़के लड़कियां दोनों शामिल है। 


जिंदगी बहुत खूबसूरत है। आप डिप्रेशन से आसानी से बाहर आ सकते हो। डॉक्टर की 
सलाह ले। फिजिकली वर्कआउट करे। आप आसानी से डिप्रेशन से बाहर आ सकते हो 
आपको हर समय पॉजिटिव रहना होगा। जो आपका मन है वो करे और खुश रहे। 




























Wednesday, October 24, 2018

ग्रीन जूस क्यूँ पिये और फायदे जाने

GREEN JUICE

ग्रीन जूस 

दोस्तों आजकल की भागदौड़ वाली जिंदगी में आप कई चीज़ों से खिलवाड़ कर रहे हो। शहरों में
प्रदूषण की मात्रा हर साल बढ़ती जा रही है। ये प्रदूषण किसी भी प्रकार का हो सकता है जैसे की
ध्वनि प्रदूषण,वायु प्रदूषण,जल प्रदूषण। प्रदूषण हमारी सेहत पर बहुत गलत असर डालती है।
पैसे कमाने की भाग दौड़ में आप सेहत से खिलवाड़ कर रहे है। सही तरीके से डाइट ना लेना।
प्रोपर guidence न होना भी आपकी सेहत को बिगाड़ देता है। दोस्तों हम आपको एक ऐसे जूस
के बारे में बताने वाला हूँ जो पोषक तत्वों से भरपूर है। हम ग्रीन जूस के बारे में बात कर रहे है।
जो भी हमारी बॉडी को Nutrients/पोषक तत्व चाहिए। कुछ हद तक ये जूस पूरा कर पायेगी।
आइये जानते है ग्रीन जूस के बारे में :

ग्रीन जूस बनाने की विधि 

1) आपको सबसे पहले 50-75 ग्राम पालक चाहिए। 
2) एक खीरा और एक सेब चाहिए। 
3) एक आंबला या एक निम्बू चाहिए। 
4) एक चौथाई अदरक का टुकड़ा चाहिए 
5) कुछ पते Luttuce  (सलाद के पते) चाहिए। 
 इन सभी को अच्छी तरह धोये। फिर जूसर में इनका जूस निकाल ले। 150-200 ml ये जूस आप 
दिन में एक बार पी सकते है। हो सके तो इसमें मीठा और नमक ना डाले। 

ग्रीन जूस के फायदे 

पालक: ग्रीन जूस में पालक होने की वजह से इसके फायदे और बढ़ जाते है।  फ्लेवोनोइड्स और 
एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण पालक  विभिन्न प्रकार के कैंसर से लड़ने में मदद करता है। 
पालक में उपस्थित फोलेट और फाइबर भी कुछ कैंसर के जोखिम को कम करते है। ये हमारे 
रोग प्रतिरोधक मतलब रोगों से लड़ने में मदद करता है और दिल से सबंधित बिमारियों से भी लड़ने 
में भी मदद करता है।
खीरा: मानसिक तनाब के लिए खीरा आपके लिए बहुत अच्छा है। ये आपके स्ट्रेस को कम करता
 है। खीरे में विटामिन-k पाया जाता है। ये हमारी cells की ग्रोथ में मदद करता है।
सेब:सेब में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते है। सेब हमारे बॉडी में एनर्जी लेवल मतलब ऊर्जा के स्तर
को बढ़ाये रखने में मदद करता है। सेब में एंटीऑक्सीडेंट गुण होने के कारण ये हमारी याददाश्त को
तेज करता है।
आंबला या निम्बू: आंबला और निम्बू में विटामिन-c भरपूर मात्रा में पाया जाता है। ये हमारे कोलेस्ट्रॉल
लेवल हो भी कम करता है। ये हमारे बॉडी से विषैले पदार्थ को बाहर निकालता है। ये हमारे इम्यून सिस्टम
को भी मजबूत बनाता है। आपकी इम्युनिटी ठीक होगी तो आप कम बीमार होंगे।
अदरक:अदरक में एंटीसेप्टिक,एंटीफंगल,एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते है।  हमारी बॉडी की
सूजन और दर्द को कम करता है।
Luttuce (सलाद के पते): ये ऑप्शनल है आपको मार्किट में मिल जाये तो अच्छी बात है नहीं मिले
तो इसके बिना भी जूस बना सकते है। सलाद के पते हमारे Bad कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। जिससे
स्ट्रोक यानि हार्ट अटैक से ये हमे बचता है।

ग्रीन जूस क्यूँ पिये:

1) ग्रीन जूस पीने से हमारे स्किन में चमक आती है। जब आप अपने फेस तो देखते है तो आपके फेस 
पर एक चमक देखोगे।
2) ग्रीन जूस आपके Bad कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है। जिससे 
स्ट्रोक यानि हार्ट अटैक से बचाता है। 
3) हम जब कुछ खाते है जैसे जंक फ़ूड, या कोई ऑयली चीज़े,या मीट, तो हमारी बॉडी में टोक्सिन 
अर्थात विषैले पदार्थ जमा हो जाते है। उन विषैले पदार्थ को निकालने के लिए ग्रीन जूस बहुत अच्छा 
है। 
4) ग्रीन जूस हमारी फेस की रिंकल को कम करता है और स्किन में जो ढीलापन है उसको सही करता 
है मतलब स्किन की elasticity को सही करता है। 
5) ग्रीन आपको कई तरह के कैंसर से भी बचाएगा।   




Monday, October 15, 2018

चुकंदर रोज खाये और उसके गुणों को पहचाने





BEETROOT JUICE

BEETROOT JUICE BENEFITS

   चुकंदर यानि की Beetroot हमारी सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है। चुकंदर में काफी मात्रा 
    में फाइबर, फ्लेवेनॉइड्स और बीटासायनिन होता है। जिसकी बजह से इसका रंग लाल होता 
    है।  चुकंदर में कई तरह के विटामिन ,मिनरल पाए जाते है। वास्तव में लोगो को इनके औषद्यि 
   गुणों का पता नहीं होता है। आइये हम आपको बताते है चुकंदर के बारे में और जाने क्या है 
   इसके फायदे और ये हमारे लिए क्यों जरुरी है। 


1) चुकंदर High Blood Pressure के मरीजों के  लिए बहुत अच्छा है। जिनका Blood Pressure High
    रहता है ये जूस Blood Pressure को Normal रखता है। ये जूस High Blood Pressure  कारण
    होने वाली हमारे शरीर में सूजन को भी कम करता है।
2) चुकंदर में Iron की मात्रा बहुत अधिक होती है। Iron की मात्रा अधिक होने के कारण ये हमारी
    खून की मात्रा को सही करता है।
3) दोस्तों चुकंदर कैंसर से बचाब करता है हो सके तो हफ्ते में 2 से 3 बार चुकंदर जूस पिए जिससे
    आपको कैंसर की बीमारी छू नहीं पायेगी।
4) आपके Bad कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ गयी है तो चुकंदर जूस पिए। ये Bad कोलेस्ट्रॉल की मात्रा
    को कम करने में मदद करता है।
5) गर्भवती महिलाओं के लिए चुकंदर का जूस बहुत लाभकारी है क्यूंकि चुकंदर में फोलिक एसिड 
    पाया जाता है। चुकंदर गर्भवती महिला और उसके बच्चे के लिए बहुत जरुरी है। ये बच्चे की 
   हडियों को मजबूत बनाता है। चुकंदर गर्भवती महिला और उसके बच्चे को अतिरिक्त ऊर्जा 
   प्रदान करता है। 
6) चुकंदर का जूस Sex Hormones के लिए बहुत जरुरी है क्यूंकि चुकंदर में बोरॉन नामक 
   एक तत्त्व पाया जाता है जो Sex Hormones के निर्माण में मदद है। 
7) चुकंदर का जूस हमारे शरीर से टोक्सिन यानि बिषाले पदार्थ  को बाहर निकलता है। चुकंदर 
     में फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है जिससे ये कब्ज की समस्या को दूर करता है। 
8) चुकंदर का जूस आपके स्टैमिना को बनाए रखने के लिए बहुत जरुरी है। इसको पीने से आपकी 
    बॉडी में ऑक्सीजन की आपूर्ति सही तरीके से होती है। जिससे आपका स्टैमिना बना रहता है। 
9) 1 चुकंदर ,4 गाज़र ,अदरक का टुकड़ा,पुदीना और आधा निम्बू ले। इसका जूस बनाए और सुबह
     खाली पेट पिये। इससे आपका बजन बहुत जल्दी कम होगा।
10) डायबिटीज के मरीजों के लिए भी चुकंदर बहुत लाभकारी है। जब चुकंदर का जूस पिए
      डायबिटीज के मरीज  5 से 6 घंटे तक मीठा ना खाये क्यों की चुकंदर में भी प्राकृतिक मिठास
      होती है।
11) चुकंदर का जूस Skin Disease के लिए बहुत अच्छा होता है। जैसे की आपको Acne है ,
       एक्जिमा है और भी कई तरह के स्किन इन्फेक्शन है उसे भी ये काफी हद तक ठीक करता है।
12) चुकंदर हमारे हार्ट के लिए बहुत अच्छा है ये हमारे हार्ट को मजबूत बनता है।
13) चुकंदर हमारे लीवर के लिए भी बहुत अच्छा है। ये हमारे लीवर को साफ़ रखता है यानि की
       ये हमारे लीवर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालता है।
14) चुकंदर आपके शुक्रधातु की कमजोरी यानि की वीर्य (स्पर्म) को सही करता है। मतलब
      ये हमारे स्पर्म की गुणवत्ता को सही करता है।
15) चुकंदर हमारी मांसपेशियों को मजबूत  बनाता है। ये मांसपेशियों की कमजोरी को दूर करता
      है।
16) चुकंदर का जूस पीने से हमारी बॉडी की चमक बढ़ती है जिससे आपका चेहरा बहुत चमकदार
      दिखाई देता है। चुकंदर और टमाटर के जूस को चेहरे के डार्क सर्कल पर 1 महीने तक हर रोज़
      लगाए इससे डार्क सर्कल काफी हद तक कम हो जाते है।
17) चुकंदर का जूस आप Pre workout यानि जिम जाने से पहले भी पी सकते है। आप इसको
      जिम जाने से पहले 30 मिनट पहले पिए। इससे आपको ताकत मिलती है। और जिम में
       वेट उठाने के बाद होने वाली थकबाट आपको नहीं होगी।

      चुकंदर का जूस बनाने की विधि 

1)    200-250 ग्राम चुकंदर ले।
2)    कुछ पत्तियां पुदीने की ले।
3)    थोड़ी सी अदरक ले।
4)    आधा निम्बू ले।

        इनका जूस निकाले और हफ्ते में 3-4 बार पिए। 100-200 ml तक ही ये जूस दिन में एक
        बार पिए। जिससे आपको ताकत भी मिलेगी और कई तरह की बिमारियों से भी बच सकते
        है।

Monday, October 8, 2018

टाइफाइड बुखार

Typhoid Fever

टाइफाइड बुखार Salmonella Typhi और Salmonella Paratyphi नाम के बैक्टीरिया से होती
है। ये बैक्टीरिया हमारे खाने-पीने से हमारे शरीर में प्रवेश करता है  जैसे गंदे पानी ,संक्रमित जूस
 और कई तरह के पेय पदार्थ से हमारे शरीर में प्रवेश करता है। किसी संक्रमित व्यक्ति के झूठा
भोजन या कोई भी खाद्य पदार्थ खाने के कारण भी टाइफाइड की संभाबना बढ़ जाती है। यह
 Salmonella बैक्टीरिया हमारे पाचनतंत्र और खून में मिलकर सक्रामक रोग फैलाने लगता  है।
 जिससे संक्रमित व्यक्ति को बुखार आने लगता है। Salmonella नामक बैक्टीरिया हमारे शरीर
में एक जगह से दूसरी जगह घूमता रहा है जैसे लिवर से पित्ताशय आदि में घूमता रहता है। टाइफाइड
एक संक्रामक बीमारी है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है। टाइफाइड के कई लक्षण
हो सकते है आइये जानते है उन लक्षणों को-

टाइफाइड के लक्षण
टाइफाइड के पहले चरण में या टाइफाइड के पहले हफ्ते में बहुत तेज़ बुखार आता है और ये 
धीरे धीरे बढ़ता जाता है जिसके कारण सर दर्द होना,हाथ पैर में बहुत दर्द होना। आपको कब्ज
भी हो सकती है या दस्त भी लग सकते है। टाइफाइड में मरीज को भूख नहीं लगती है। टाइफाइड
में बुखार बढ़ने के साथ साथ आपके pulse बढ़ने चाहिए पर टाइफाइड बुखार में आपको इसका
उल्टा होता है बुखार बढ़ने के साथ साथ आपके pulse कम होते है। टाइफाइड के दूसरे चरण
में या टाइफाइड के दूसरे हफ्ते में शरीर में लाल रंग के दाने निकलने लगते है आपकी पीठ और
पेट के ऊपर। टाइफाइड के कारण पेट में दर्द हो सकता है,पेट भी फूल सकता है। टाइफाइड के
तीसरे चरण में या टाइफाइड के तीसरे हफ्ते में मरीज का mental function disturb हो जाता है।
जिसके कारण वो अजीब सी बातें करने लगता है। टाइफाइड के कारण बैक्टीरिया small intestine
में फस जाते है जिसके कारण Bones और Joint में Infection भी हो सकता है और इसके साथ 
और कई बीमारियां लग सकती है। जैसे Meningitis मतलब brain में सूजन या जलन हो सकती है। 
Nephritis मतलब किडनी में सूजन या जलन हो सकती है। Cholecystitis मतलब पित्ताशय 
(gall bladder) में भी सूजन हो सकती है। टाइफाइड के कारण आपको उल्टियां भी हो सकती है
पर ये बहुत कम cases में देखा गया है।

टाइफाइड की जाँच 
टाइफाइड की जाँच किस तरह से होती है हम आपको बताते है। शुरुआती स्टेज में रोगी को ब्लड
टेस्ट करवाना पड़ता है ब्लड टेस्ट करवा कर उसका इलाज शुरू किया जाता है। उसके इलाबा
रोगी का स्टूल टेस्ट करके उसके शरीर में टाइफाइड की  बैक्टीरिया की मौजूदगी का पता लगाया
जाता है। Widal Test भी टाइफाइड के लिए किया जाता है। कभी कभी ज्यादा बैक्टीरिया होने पर
अगर मरीज को ज्यादा पेट दर्द या उल्टी हो तो सोनोग्राफी भी करनी पड़ती है।

 टाइफाइड से कैसे बचे 
हम अपने दिनचर्या (Daily routine) में बदलाब करके भी टाइफाइड से बच सकते है। हमे कुछ
बदलाब करने पड़ेगे जिससे कई प्रकार के बैक्टीरिया और वायरस वाली बिमारियों से बच सकते है।
1) कुछ भी खाने से पहले अपने हाथ साबुन से धोले जिसे आपके हाथ से बैक्टीरिया मर जाएगे।
2) पानी उबाल कर पिए या अच्छा सा water filter घर पर लगाए।
3) सब्जियां पका कर ही खाये। कच्ची सब्जियां खाने से पहले उसको गरम पानी में 1-2 बार धो
 ले।
4) हरी सब्जियां और फल ज्यादा से ज्यादा खाये पर उन्हें खाने से पहले गरम पानी में धोये।
5) हफ्ते में एक बार एलोवेरा जूस पिए और हफ्ते में एक बार wheat grass(गेहूं का रस)
 पिए जिससे आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी। 

टाइफाइड का इलाज 
टाइफाइड के इलाज के लिए एंटीबायोटिक दी जाती है। बैक्टीरिया को मारने के लिए ये एंटीबायोटिक 
दी जाती है। टाइफाइड के शुरुआती अवस्था में इसका इलाज एंटीबायोटिक गोलियों और इंजेक्शन 
के द्वारा किया जाता है जिससे 2 -3 हफ़्तों में आपका टाइफाइड ठीक हो जाता हैं। इसके साथ आपको 
परहेज रखना बहुत जरुरी है। 

बच्चों का टाइफाइड का इलाज कैसे करे 
दोस्तों टाइफाइड के लिए छोटे बच्चों का इलाज होम्योपैथी और आयुर्वेदिक दवाइयों से करे क्यूंकि 
अलोपैथी दवाइयों से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है जिससे शरीर का सिस्टम 
बिगड़ जाता है जिससे उनको आगे चल कर उन्हें डायबिटीस भी हो सकती है। क्यूंकि टाइफाइड 
की अलोपैथी दवाइयां बहुत गरम होती है। इसलिए जो बच्चे 15 या 15 साल से नीचे है उनका 
इलाज टाइफाइड का आयुर्वेदिक या होम्योपैथी दवाइयों से हे करे।  

टाइफाइड का घरेलु उपचार 
1) 5-7 तुलसी के पते,थोड़ी सी अदरक और एक छोटी  इलाची ले फिर उसके एक कप पानी डाल 
  दे फिर उबाले जब ये एक चौथाई रह जाये तब छननी से छान कर पी ले। आपको टाइफाइड
 के बुखार में कुछ आराम मिलेगा। 
2) सेब का रस निकालकर उसमे अदरक का रस मिलाये ये भी हर तरह के बुखार में राहत दिलाता 
 है।  
3) पुदीने के कुछ पते और अदरक का छोटा सा टुकड़ा ले दोनों को पीस ले। फिर इसमें एक कप 
 पानी मिलाये।फिर पुदीने के पते और अदरक की पेस्ट को पानी में मिला कर एक घोल बना ले। 
 इससे दिन में दो बार सुबह शाम पिए। 
4) एक दो चम्मच प्याज़ का रस दिन में दो-तीन बार पीने से भी आपका बुखार उतरने लगता है। 
   प्याज़ का रस पीने सेआपको कब्ज़ से भी छुटकारा मिलयेगा।
5) टाइफाइड के बुखार से बचने के लिए आप लहसुन भी खा सकते है। सुबह खाली पेट एक या 
दो कलियाँ लहसुन की खाये गुनगुने पानी के साथ। लहसुन में एंटीबायोटिक गुण होता है जिसमे 
टाइफाइड बुखार में बनने वाले बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करता है। 
6) लोंग का पानी भी आप पी सकते है। 5-6 लोंग ले उसमे एक लीटर पानी  मिलाये 
   फिर इसे उबाल  ले जब ये आधा रह जाये ठंडा होने दे। फिर छननी से छान ले। एक हफ्ते तक इसे 
  पिए। 
7) 4 से 5 मुनक्का , 6-8 अंजीर और 1 से 2 ग्राम खूबकला ले। इनसब को मिलाले और पेस्ट बना ले। 
 सुबह खाली पेट और शाम को सोते समय इन्हे ले। 1 चम्मच सुबह और एक चम्मच शाम को ले और 
 छोटे बच्चों को इसका आधा चम्मच सुबह शाम ले। 








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